Bhopal : हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हर साल पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। अगले 15 दिनों तक पितृ पक्ष चलते हैं और सभी लोग अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध करते हैं। शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त होती हैं। पुराणों में भी लिखा गया है कि पितृ पक्ष में यमराज 15 दिन के लिए पितृों को आजाद करते हैं। इस दौरान उनकी श्राद्ध करने से उन्हें भोजन मिलता है। इन 15 दिनों में पितृ अपने परिजनों से श्राद्ध का अन्न और जल ग्रहण कर तृप्त होते हैं। इस साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की शुरुआत 21 सितंबर से हो रही है, लेकिन पितृ पूजन एक दिन पहले 20 सितंबर से ही शुरू हो जाएगा। वहीं 6 अक्टूबर को पितृ पक्ष का आखिरी दिन होगा।
क्या है पितृ पक्ष का महत्व
हिंदू धर्म में मरने के बाद भी पुरखों को याद किया जाता है और उन्हीं की याद में श्राद्ध किया जाता है। पुरखों की मौत की तिथि के अनुसार श्राद्ध की तिथि भी निर्धारित की जाती है। ऐसी मान्यता है कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के दौरान पितृ धरती पर आते हैं और उनके वंशज श्राद्ध में जो भी अन्न जल का दान करते हैं या कौवों को खिलाते हैं, उसे ग्रहण कर के तृप्त हो जाते हैं। श्राद्ध पक्ष कृष्ण पक्ष से शुरू होकर अमावस्या तक 16 दिनों के लिए होता है। अन्न जल ग्रहण करने के बाद पितृ अपने सगे- संबंधियों को आशीर्वाद देकर लौट जाते हैं।
श्राद्ध न करने पर नहीं मिलती शांति
हिंदू धर्म में यह भी मान्यता है कि अगर किसी पितृ के परिजन उनकी श्राद्ध नहीं करते हैं तो उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलती है। इसके अलावा पितृ पक्ष में रोज दान पुण्य करने से पितृ दोष भी दूर हो जाता है।
भाद्र पूर्णिमा से शुरू होता है तर्पण
भाद्र पूर्णिमा के दिन पितरों को तर्पण की शुरुआत होती है। इस दिन मुनि अगस्त को तर्पण किया जाता है। इसीलिए इसे ऋषि पूर्णिमा भी कहा जाता है। मुनि अगस्त ने ऋषियों की रक्षा के लिए एक समुद्रध पी लिया था और दो असुरों को खा गए थे। इसलिए भाद्र पूर्णिमा के दिन सम्मान के रूप में अगस्त मुनि का तर्पण किया जाता है और इसके बाद से पितृ पक्ष का आरंभ होता है। इस साल ऋषि पूर्णिमा 20 सितंबर के दिन है। इसी दिन पहला तपर्ण दिया जाएगा।

श्राद्ध की प्रमुख तिथियां
प्रतिपदा श्राद्ध -21 सितंबर
षष्ठी श्राद्ध – 27 सितंबर
नवमी श्राद्ध – 30 सितंबर
एकादशी श्राद्ध – 2 अक्टूबर
चतुर्दशी श्राद्ध – 5 अक्टूबर
पितृ अमावस्या का श्राद्ध – 6 अक्टूबर

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