भोपाल : पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने छतरपुर के सौ साल से भी ज्यादा पुराने महाराजा कालेज का महाराज छत्रसाल विश्वविद्यालय में संविलियन किये जाने के सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है| सिंह ने कहा कि महाराजा कालेज का ऐतिहासिक महत्त्व है और बुंदेलखंड में शिक्षा के क्षेत्र में इसकी एक अलग पहचान है| उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि सरकार इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने और इसकी समृद्ध परम्परा को आगे बढ़ाने के बजाय इसका अस्तित्व मिटाने पर उतारू हो गई है| उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों राज्य मंत्रिमंडल ने छतरपुर के महाराजा कालेज का अस्तित्व समाप्त कर उसका महाराज छत्रसाल विश्वविद्यालय में संविलियन करने का निर्णय लिया है| सरकार के इस फैसले का छतरपुर और पूरे बुंदेलखंड में भारी विरोध हो रहा है| अजयसिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने नौ साल पहले छतरपुर में विश्वविद्यालय खोलने का छलावा किया है| आज तक इस विश्वविद्यालय के लिए कोई राशि नहीं दी गई जबकि विश्वविद्यालय के लिए जमीन आवंटित है लेकिन उस पर अब तक कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया| अब छत्रसाल कालेज का अस्तित्व ख़त्म करके विश्वविद्यालय चलाने की योजना बनाई गई है| जबकि होना यह चाहिए था कि राज्य सरकार यू.जी.सी. की योजनाओं के अंतर्गत फंड लेकर विश्वविद्यालय का स्वयं का भव्य भवन निर्मित करती| सिंह ने कहा कि महाराजा कालेज इस क्षेत्र का पुराना शिक्षण संस्थान है जहाँ से शिक्षा प्राप्त विद्यार्थी देश विदेश में अच्छे पदों पर काम करके कालेज का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं| उनके बारे में जानकर यहाँ के युवा छात्र अपना बेहतरीन केरियर बनाने की प्रेरणा पाते हैं| उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह से मांग की है इस ऐतिहासिक धरोहर की पहचान को बचाने के लिए महाराजा कालेज का विश्वविद्यालय में संविलियन किये जाने के फैसले को तत्काल निरस्त करें|

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