बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मध्य प्रदेश की सियासत पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं. 

भोपाल: बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भले ही इस बार चुनाव मैदान में नहीं हैं लेकिन प्रदेश की सियासत पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं. उनके बेटे आकाश विजयवर्गीय को इंदौर की तीन नंबर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. अपने बेटे को जिताने के लिए विजयवर्गीय पूरा जोर लगा रहे हैं. उनके नाम लगातार छह विधानसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड है. पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल का प्रभार सौंपा हुआ है. कैलाश विजयवर्गीय एक अच्छे भजन गायक भी हैं. सरकारी कार्यक्रम हो या चुनावी सभा, वह लोगों की फ़रमाइश पर भजन ज़रूर सुनाते हैं. बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शुमार विजयवर्गीय अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहते हैं. एक नजर उनके सियासी सफर पर:

जन्म 13 मई 1956 को इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय जब से राजनीति में आए, उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. बीएससी और एलएलबी तक शिक्षा ग्रहण की है. 1975 में विद्यार्थी परिषद से जुड़े. 1983 में पहला चुनाव पार्षद का लड़ा और जीत हासिल की. 1985 में स्थायी समित के अध्यक्ष बने. 1985 में विद्यार्थी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष और वर्ष 1993 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री रहे.

1990 में पहली बार बने विधायक
कैलाश विजयवर्गीय ने पहला विधानसभा चुनाव 1990 में इंदौर की चार नंबर सीट से लड़ा और जीत भी हासिल की. हालांकि उनका पैतृक आवास इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 में है. बाद में उन्होंने 1993, 1998 और 2003 का विधानसभा चुनाव दो नंबर सीट से ही लड़ा. यह उनकी परंपरागत सीट बन गई.

इंदौर के मेयर भी रह चुके हैं विजयवर्गीय
विजयवर्गीय वर्ष 2000 में इंदौर नगर पालिका निगम के महापौर पद पर मतदाताओं द्वारा सीधे निर्वाचित होने वाले मेयर रहे. इसी वर्ष वह अखिल भारतीय महापौर परिषद के उपाध्यक्ष मनोनीत हुए. 2000 में ही उन्हें अमेरिका में विश्व महापौर सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ मेयर के रूप में पुरस्कृत किया गया. मेयर रहने के दौरान विजयवर्गीय को और भी कई अवॉर्ड मिले. मेयर रहने के दौरान भारत सरकार ने इंदौर को क्लीन ग्रीन सिटी का पुरस्कार प्रदान किया था.

kailash vijyavargiya

2008 में महू से विधायक बने
विजयवर्गीय की परंपरागत सीट इंदौर-दो रही लेकिन वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी. उन्हें इंदौर से सटी महू विधानसभा सीट से पार्टी ने मैदान में उतारा. महू से जीत हासिल कर विजयवर्गीय विधानसभा पहुंचे और कैबिनेट मंत्री बने. 2013 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से पार्टी ने उन्हें महू सीट से टिकट दिया. हालांकि विजयवर्गीय अपनी परंपरागत सीट दो नंबर से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एक बार फिर से उन्होंने महू से कांग्रेस उम्मीदवार अंतर सिंह दरबार को पटकनी दी.

एमपी क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव में मिली हार
विधानसभा चुनाव में कभी भी हार का स्वाद न चखने वाले विजयवर्गीय ने 2011 और 2013 में मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव भी लड़ा. उनके सामने ज्योतिरादित्य सिंधिया थे लेकिन दोनों बार हार गए. 2013 में उन्हें इंदौर डिविजनल क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख चुना गया है.

 

kailash vijyavargiya

2015 में मंत्री पद छोड़कर आए राष्ट्रीय राजनीति में
12 साल तक राज्य में मंत्री का पद संभालने के बाद 2015 में विजयवर्गीय की इंट्री राष्ट्रीय राजनीति में हुई. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर अमित शाह की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बने. उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया. फिलहाल उनके पास पश्चिम बंगाल का प्रभार है. इसके साथ ही, उनकी नजर मध्य प्रदेश की सियासत पर भी है.

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