गुवाहाटी/अगरतला/ईटानगर. लोकसभा में पास किए गए नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में मंगलवार को नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में छात्र संगठनों और वाम दलों ने बंद का ऐलान किया था। असम, त्रिपुरा और अरुणाचल में इसका असर आम जनजीवन पर देखा गया। असम के डिब्रूगढ़ और जोरहाट में बिल का विरोध कर रहे लोगों ने आगजनी की। यहां मंगलवार को होने वाली सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं। इसी तरह अरुणाचल में भी बंद के चलते बाजार और सड़कें सूनी रहीं। त्रिपुरा में प्रदर्शन के मद्देनजर 48 घंटे तक इंटरनेट बैन कर दिया गया। ऑल असम स्टूडेंट यूनियन और नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन के अलावा 16 वाम संगठनों ने बंद का आह्वान किया था। इन लोगों का कहना है कि नागरिकता संशोधन बिल पक्षपातपूर्ण है। इससे नॉर्थ ईस्ट के लोगों की पहचान के अलावा सामाजिक और सांस्कृतिक ताना-बाना खतरे में पड़ रहा है।
असम में ट्रेन सेवाओं पर भी असर, पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी
गुवाहाटी में विधानसभा और सचिवालय के पास प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प भी हुई। पुलिस प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक रही थी। डिब्रूगढ़ में प्रदर्शनकारियों की सीआईएएसएफ से भिड़ंत हुई। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे लाइन पर भी प्रदर्शन किया, इसके चलते ट्रेन सेवाओं पर भी असर पड़ा।
त्रिपुरा में बाजार बंद, सड़कें सूनी
त्रिपुरा में दुकानें और सड़कों पर भीड़भाड़ नहीं दिखी। ज्यादातर बाजार बंद थे। यहां धलाई जिले में एक बाजार में कुछ दुकानों में प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी। बताया जा रहा है कि इन दुकानों के मालिक गैर-आदिवासी थे। इसके अलावा कुछ और जगहों पर भी आगजनी की घटनाएं हुईं। पुलिस ने बताया कि बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, लेकिन आगजनी की घटनाओं से गैर-आदिवासी दुकानदार डरे हुए हैं। पूरे त्रिपुरा में ट्रेन सेवाओं पर असर पड़ा।
मेघालय में आगजनी की घटनाएं
अरुणाचल प्रदेश में शिक्षण संस्थान, बैंक और व्यापारिक संस्थान बंद रहे। सड़कों पर सरकारी वाहन ही नजर आए। यहां ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट यूनियन ने बंद बुलाया था। सरकारी दफ्तरों में भी कर्मचारियों की संख्या न के बराबर रही। इसके अलावा मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में आगजनी की घटनाएं सामने आईं। ईस्ट खासी हिल्स जिले में पुलिस की गाड़ियों पर पेट्रोल बम फेंके गए। संवेदनशील इलाकों में सीआरपीएफ की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं।
बिल का मकसद 3 देशों के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता देना
नागरिकता संशोधन बिल 2019 गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता का मौका प्रदान करता है। इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में किसी तरह की धार्मिक बाध्यता का सामना करने वाले लोग आवेदन दे सकते हैं। भारत में पांच साल रहने के बाद उन लोगों को भारत की नागरिकता दे दी जाएगी। वर्तमान नियमों के अनुसार 11 साल बाद यह नागरिकता दी जा रही थी। बिल सोमवार को आधी रात लोकसभा में पास हुआ।

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