मुंबई/पटना। लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन बिल (कैब) पर गैर-राजग तथा राजग के घटक दलों के समर्थन से उसे आसानी से पारित कराए जाने के बाद अब सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। बिल पर राज्यसभा में सरकार की असली परीक्षा होगी। राज्यसभा में यह बिल बुधवार को पेश किया जाना है। राज्यसभा में विपक्ष मजबूत स्थिति में है। मालूम हो कि पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना से तंग होकर भारत आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने वाले- नागरिकता संशोधन बिल को लोकसभा ने सोमवार देर रात 80 के मुकाबले 311 मतों से पारित कर दिया था। इससे पहले शिवसेना ने मंगलवार को यू-टर्न का संकेत दिया, जबकि राजग के सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के भी दो वरिष्ठ नेताओं ने अपने नेतृत्व के फैसले से असहमति जताते हुए समर्थन को लेकर पुनर्विचार की अपील की है। मालूम हो इन दोनों ही पार्टियों ने लोकसभा में बिल का समर्थन किया था। यह बिल बुधवार को राज्यसभा में रखा जाएगा। हाल ही में भाजपा से अलग होकर महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा के संग महा विकास अघाडी की सरकार बनाने वाली शिवसेना के अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफ-साफ कहा कि जब तक उनकी पार्टी द्वारा उठाए गए सवालों पर बातें स्पष्ट नहीं हो जातीं, तब शिवसेना राज्यसभा में बिल का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि बिल पर विस्तृत चर्चा और बहस जरूरी है।
जरूरत है धारणा बदलने की : उद्धव
ठाकरे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मोदी सरकार को बिल लागू करने से ज्यादा अर्थव्यवस्था, रोजगार संकट तथा बढ़ती मंहगाई खासकर प्याज की कीमतों जैसी अन्य समस्याओं की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा- ‘हमें इस धारणा को बदलने की बदलने की जरूरत है कि जो इस बिल और भाजपा का समर्थन करेगा, वह राष्ट्रभक्त है और जो इसका विरोध करेगा वह राष्ट्र विरोधी है। सरकार को इस पर उठाए गए सभी सवालों के जवाब देने चाहिए।”

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