नई दिल्ली. बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान बुलबुल शनिवार रात पश्चिम बंगाल के सागर आइलैंड्स, ओडिशा के भद्रक और बांग्लादेश के खेपूपाड़ा में तट से टकराया। तूफान की रफ्तार करीब 110 से 120 किमी प्रतिघंटा रही। हालांकि टकराने के बाद तूफान कमजोर पड़ गया। इससे करीब 3 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। कोलकाता और उत्तर 24 परगना जिले में शनिवार से बारिश से जुड़ी घटनाओं में 5 लोगों की मौत हुई। ईस्ट मिदनापुर जिले में दो की जान गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात कर तूफान से हुई तबाही का जायजा लिया। उन्होंने केंद्र की ओर से बंगाल को हर संभव मदद देना का वादा किया है। तूफान के असर के चलते दोनों राज्यों के तटीय इलाकों में भारी बारिश हुई। तूफान काे देखते हुए काेलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बाेस हवाईअड्डे पर शनिवार शाम 6 बजे से 12 घंटे के लिए उड़ानाें पर राेक लगा दी गई। राज्य में एनडीआरएफ की 35 टीमें तैनात की गई हैं। बांग्लादेश में बुलबुल चक्रवात के कारण दो लोगों की मौत हो गई। करीब 21 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।
तूफान ‘अति गंभीर’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में किया गया
मौसम विभाग के मुताबिक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तट से टकराने के वक्त तूफान की रफ्तार 120 से 135 किमी प्रति घंटे थी। हालांकि, पश्चिम बंगाल से गुजरने के साथ ही तूफान कमजाेर पड़ गया। इसे ‘अति गंभीर’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में कर दिया है। तूफान का केंद्र देर रात पारादीप से 95 किमी पूर्व-उत्तरपूर्व में बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में था। भद्रक जिले में डीहा द्वीप के पास नाव डूबने से समुद्र में फंसे 8 मछुआराें काे रैपिड एक्शन फोर्स ने अन्य मछुआरों की मदद से बचाया है।
बांग्लादेश में तूफान से 150 मछुआरे लापता
तूफान में बांग्लादेश के भोला, बारगुना और पटुआखाली से 150 मछुआरे लापता हैं। हालांकि, अधिकारियों ने 15000 वॉलंटियर्स की मदद से करीब 15 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

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