नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी(आप) के 27 विधायकों को अयोग्य ठहराने करने की याचिका को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग की राय के आधार पर खारिज कर दिया। विभोर आनंद ने इस आधार पर उन्हें आयोग्य घोषित करने की मांग की थी कि वे दिल्ली में सरकारी अस्पतालों में रोगी कल्याण समिति के चेयरपर्सन होने के नाते लाभ के पद पर बने हुए हैं। राष्ट्रपति ने इस याचिका को ‘अनुरक्षणीय’ नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। इससे पहले, चुनाव आयोग ने अपनी राय में कहा था कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में रोगी कल्याण समिति के चेयरपर्सन का कार्यालय दिल्ली के विधानसभा सदस्य (अयोग्यता को हटाने) विधेयक, 1997 के अंतर्गत छूट की श्रेणी के अंतर्गत आता है और इसलिए विधायकों को लाभ का पद धारण करने के मामले में अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत की अगुवाई में तीन सदस्यीय आयोग ने अपनी राय में कहा, ‘‘यह स्थापित तथ्य है कि कुछ प्रतिवादियों को कभी भी उक्त कार्याल्य में नियुक्त नहीं किया गया, निष्कर्ष यह निकला कि उक्त कार्यालय छूट की श्रेणी में आता है।’’

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