वाराणसी। सोमवार को गणेश चतुर्थी है। देश भर में धूमधाम से गाजे—बाजे के साथ बप्पा को घरों में विराजित किया जाएगा और इसी के साथ दस दिनी गणेशोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। चतुर्थी तिथि सुबह 9.02 बजे लग रही है जो तीन सितंबर को सुबह 6.50 बजे तक रहेगी। इस तिथि को वैनायिकी वरद श्रीगणेश चतुर्थी भी कहा जाता है।
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार अभिजित मुहूर्त सुबह लगभग 11.55 से दोपहर 12.40 तक रहेगा। गणेश चतुर्थी के दिन गणपति की पूजा दोपहर के समय करना शुभ माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि भाद्रपद महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेश जी का जन्म हुआ था।
पूरे दिन शुभ संयोग
गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल में अभिजित मुहूर्त के संयोग पर गणेश भगवान की मूर्ति की स्थापना करना शुभ रहेगा। इसके अलावा पूरे दिन शुभ संयोग होने से सुविधा अनुसार किसी भी शुभ लग्न या चौघड़िया मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना कर सकते हैं।
शास्त्र के अनुसार यह है महत्व
शास्त्र के अनुसार भाद्र शुक्ल चतुर्थी में चंद्रास्त भी दो सितंबर को ही मिल रहा है और चंद्रास्त रात 8.41 पर होगा। विघ्न विनाशक प्रभु श्रीगणेश के इस जन्मोत्सव व्रत पर्व को महाराष्ट्र में सिद्धि विनायक व तमिलनाडु में विनायक चतुर्थी तो बंगाल में सौभाग्य चतुर्थी के रूप में मनाते हैं। महाराष्ट्र में इसकी खूब धूम होती है। काशी में भी इसका रंग साल-दर-साल निखरता जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार तिथि विशेष पर सुबह खानादि कर ‘जन्म जन्मांतर तक पुत्र-पौत्र व धन, जय, यश, ऐश्र्वर्य, प्रभुत्व सभी की अभिवृद्धि के लिए व्रत रहूंगी या रहूंगा।’
ऐसे करें गणेश पूजा
गणेश प्रतिमा की स्थापना कर मंत्रोच्चार, ध्यान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, पंचामृत स्नान, वस्त्र भूषण, यज्ञोपवीत, सिंदूर आदि से पूजा करनी चाहिए। लड्डू, ऋतु फल, दुर्वा आदि नैवेद्य मंत्र संग अर्पित करना चाहिए।
चंद्रमा को देखने से चंद्र दोष
ऐसा कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से चंद्र दोष होता है। अतः रात 8.41 बजे यानी चंद्रास्त के समय तक चंद्रमा की ओर नहीं देखना चाहिए।
पूजन सामग्री
शुद्ध जल, या गंगाजल, सिन्दूर, कुमकुम ,रक्षासूत्र , वस्त्र, कपूर, घी, दही, दूर्वा, फूल, पान, पूजा की सुपारी, रूई, लड्डू, मोदक, पंचामृत आदी का प्रसाद।
आवाहन मंत्र
शुक्लाम्बर धरं विष्णुं शशि वर्णम् चतुर्भुजम् । प्रसन्न वदनं ध्यायेत् सर्व विघ्नोपशान्तये ।।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here