हिसार जींद। हत्या के मामले में रामपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। 19 नवंबर 2014 को बरवाला थाने में केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने इस मामले की 3 माह 11 दिन तक तफ्तीश की। 28 माह तक कोर्ट में ट्रायल चला, जिसमें 68 गवाहियां हुईं। करीब चार साल में इस मामले में मंगलवार को फैसला सुनाया गया। इससे पहले 26 फरवरी 2015 को कोर्ट में चालान पेश होने के बाद 30 सितंबर 2016 को सभी 15 आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए गए थे। बता दें, 2014 में रामपाल के आश्रम में छापेमारी के दौरान हुई हिंसा में छह लोग मारे गए थे। कोई तनाव नहीं : रामपाल के खिलाफ फैसला सुनाए जाने के दौरान किसी भी प्रकार की कोई तनाव नजर नहीं आया। सुरक्षा के लिहाज से तीस ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए। दूसरे जिलों से पुलिस बुलाई गई। सात जिलों की पुलिस फोर्स सहित 2000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। हिसार जिले में सुरक्षा के लिहाज से नाके लगाए गए और चेकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान बुधवार को भी जारी रहेगा क्योंकि एक अन्य मामले में भी रामपाल पर फैसला आना है। सरकार के कब्जे में बाबा की संपत्ति : रामपाल की संपत्ति प्रदेश सरकार के कब्जे में है। रामपाल पर देश के खिलाफ युद्ध की साजिश सहित अन्य धाराओं में भी केस दर्ज है। एफआईआर नंबर 428 के तहत पुलिस ने 1967 एक्ट के तहत रामपाल की चल-अचल संपत्ति को अटैच किया। इस एफआईआर में रामपाल पर गंभीर आरोप के तहत केस दर्ज किया गया था। देश के खिलाफ साजिश करने की धाराओं में दर्ज केस में पुलिस संपत्ति को अटैच किया। यह संपत्ति अटैच हुई : 12.75 एकड़ में बना सतलोक आश्रम, 93 कनाल 11 मरला में बरवाला में ही बना दूसरा आश्रम, दौलतपुर में 7 कनाल 19 मरला में आश्रम, ढाणी प्रेम नगर में 9 मरला जमीन, छह बैंक खातों में जमा 4 लाख 48 हजार 64 रुपये, सतलोक आश्रम में सामान की बोली से मिले 55 लाख 68 हजार 712 रुपये, आश्रम की पुलिस के पास जब्त करीब 43 लाख 31 हजार 911 रुपये की संपत्ति। यह चल संपत्ति भी अटैच : बिजली के ट्रांसफार्मर, 70 से अधिक वाहन, फर्नीचर, पशु, लोहे का सामान, स्टील के बर्तन, पंखे, कूलर, क्रॉकरी का सामान, किचन का सामान, बेड सहित अन्य सैकड़ों तरह के सामान। हाईकोर्ट ने कहा था रामपाल से वसूलो पूरा खर्च : पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने रामपाल प्रकरण में आश्रम को खाली कर रामपाल की गिरफ्तारी के लिए प्रदेश सरकार की ओर से खर्च हुए करीब 19 करोड़ रुपये रामपाल से ही वसूलने के निर्देश दिए थे। उच्च न्यायालय इस प्रकरण पर हुए पूरे खर्च का ब्योरा भी मांगा था। जिसमें सीआरपीएफ की तैनाती, हरियाणा पुलिस के जवानों की तैनाती, हरियाणा रोडवेज की बसों, क्रेन, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस सहित अन्य सभी खर्च का आकलन हरियाणा पुलिस ने किया था।

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