भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नजूल भूमि के संबंध में 50 वर्षों बाद राज्य मंत्री परिषद ने अभूतपूर्व फैसला किया है, जिसके चलते अब आवासीय नजूल भूमि के स्थाई पट्टाधारियों को भूमिस्वामी हक मिल सकेगा साथ ही अस्थाई पट्टाधारियों को भूमि का स्थाई पट्टा मिल सकेगा। वे भूमि का अंतरण करा सकेंगे तथा इस पर बैंक से ऋण भी ले सकेंगे। वे भूमि के मालिक बन जाएंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि इस संबंध में राजस्व विभाग काफी समय से निरंतर कार्य कर रहा था। उन्होंने इस ऐतिहासिक एवं जनकल्याणकारी फैसले के लिए राजस्व विभाग सहित संबंधित सभी को बधाई दी। प्रक्रियात्मक प्रावधानों पर निर्णय ले सकेगी समिति : मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ‘मध्यप्रदेश नजूल निवर्तन निर्देश-2020’ के प्रक्रियात्मक प्रावधानों के संबंध में निर्णय के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की जा रही समिति अधिकृत होगी, जिससे निर्देशों के पालन में प्रक्रियात्मक देरी नहीं होगी। नजूल भूमि की नई परिभाषा : नजूल भूमि की नई परिभाषा के अनुसार अब समस्त नजूल भूमियां शासकीय भूमि होंगी तथा जिनको भी पूर्व में ये भूमियां आवंटित की गई हैं, उन्हें सरकार भूमि स्वामी का हक दे सकेगी। नजूल भूमि की स्पष्ट परिभाषा हो जाने से अब भू-माफियाओं के विरूद्ध कानूनी व अन्य कार्रवाई आसान होगी। ‘एकजाई’ एवं अद्यतन संकलन : वर्तमान में राजस्व पुस्तक परिपत्र में नजूल भूमि के संबंध में विभिन्न प्रावधान विभिन्न स्थानों पर संकलित किए गए हैं, जिनकी संख्या सैकड़ों में हो गई है। सभी प्रावधानों को समेकित कर तथा कुछ नए प्रावधानों को जोड़े जाकर एकजाई एवं अद्यतन संकलन ‘मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वतन निर्देश 2020’ के रूप में जारी किया गया है। चैरेटेबिल संस्थाओं को रिआयती दर पर भूमि : प्रावधानों के अनुसार चैरेटेबिल संस्थाओं को रिआयती दर पर भूमि दी जा सकेगी। गोशालाओं को 10 एकड़ तक भूमि 01 रूपए वार्षिक लाइसेंस शुल्क पर दी जा सकेगी। कृषि प्रयोजन के लिए भी भूमि के स्थाई अधिकार दिए जा सकेंगे।                                                                                               मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वतन निर्देश 2020 – नये प्रावधान                                                     1. नजूल भूमि की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है तथा समस्त नजूल भूमि की जानकारी लैण्ड बैंक के नाम से वैबसाइट पर भी प्रदर्शित की जाएगी।
2. नीलामी (ई-ऑक्शन की प्रक्रिया द्वारा) के माध्यम से भूमिस्वामी हक में निवर्तन।
3. पुल-पुलिया के साथ ही कन्वेयर बैल्ट या रोप ट्राली लगाने के लिए लाइसेंस एवं गौशालाओं के लिए लाइसेंस का प्रावधान।
4. शासकीय भूमि के निवर्तन के लिए त्रि-स्तरीय समितियों, यथा-जिला, संभाग एवं राज्य स्तर के गठन का प्रावधान।
5. बड़े क्षेत्रफल की शासकीय भूमि के चयन एवं नीलामी के लिए भूमि प्रबंधन प्राधिकारी के गठन का प्रावधान।
6. वर्तमान भू-भाटक जो सामान्यत: प्रब्याजी का 5 प्रतिशत अथवा 7.5 प्रतिशत निर्धारित होता है, के स्थान पर मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू-राजस्व का निर्धारण तथा पुर्ननिर्धारण) 2018 की विहित दर का दोगुना, जो पूर्व में देय भू-भाटक की तुलना में कम होगा।
7. अस्थाई पट्टे का प्रावधान समाप्त किया जाना तथा पूर्व में जारी अस्थाई पट्टों का स्थाई में संपरिवर्तन का प्रावधान किया गया है।
8. आवासीय भूमि के स्थाई पट्टेदारों द्वारा उनके पट्टे का भूमिस्वामी हक में संपरिवर्तन कराने का प्रावधान।
नगरीय क्षेत्रों में भू-धारकों को मिल सकेंगे स्थाई पट्टे
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के अनुसार नगरीय क्षेत्रों में स्थित ऐसे सभी शासकीय भूमिधारकों (भू-खण्डों के अधिभोगियों) को, जो 31 दिसम्बर 2014 या उसके पूर्व से भू-खण्ड के निर्बाध आधिपत्य में हैं, उन्हें उस भू-खण्ड का स्थाई पट्टा प्रदान किया जाएगा। उन्हें चिन्हांकित कर निर्धारित प्रब्याजी एवं भू-भाटक लेकर 30 वर्ष का स्थाई पट्टा दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें ऑनलाइन आवेदन करना होगा। कलेक्टर द्वारा निर्धारित प्रक्रिया अनुसार जाँच पूरी कर पट्टे दिए जाने की कार्रवाई की जाएगी। भू-खण्ड पर मालिकाना हक मिल जाने से वे भू-खण्डों के बेहतर उपयोग के लिए बैंक से ऋण प्राप्त कर सकेंगे तथा भू-खण्डों का अंतरण भी कर सकेंगे। यह व्यवस्था ऐसे व्यक्तियों के लिए वरदान साबित होगी। वहीं इससे राज्य शासन को प्रब्याजी एवं भू-भाटक के रूप में राजस्व आय भी प्राप्त होगी।

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