नई दिल्ली। दुनिया के बाकी देशों की तरह भारत में भी कोरोना वायरस (कोविड-19) का खतरा बढ़ता जा रहा है। भारत में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वायरस के कारण अभी तक 17 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 724 लोग संक्रमित हैं। महामारी से बचाव के लिए सरकार ने 21 दिनों के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लगाया हुआ है। आज लॉकडाउन का तीसरा दिन है। कल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 लाख 70 हजार करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया है। आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने भी कई बड़े ऐलान किए हैं। कोरोना संकट के बीच आर्थिक स्थिरता और महंगाई को काबू में रखने के लिए आरबीआई ने कई उपायों की घोषणा की। शुक्रवार को आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस ब्रीफिंग की है।

चलिए जानते हैं प्रेस ब्रीफिंग की बड़ी बातें-

कमर्शल और क्षेत्रीय बैंकों को तीन महीने तक कर्ज और ब्याज पर राहत देने की सलाह दी गई।
रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई।
रेपो रेट 5.1 फीसद से 4.4 फीसद की गई।
रिवर्स रेपो रेट में 90 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई।
रिवर्स रेपो रेट 90 बेसिस प्वाइंट घटाकर 4 फीसद की गई।
कोरोना के चलते GDP पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
आरबीआई ने बैंकों से ऋण देने को बढ़ावा देने को कहा है।
कच्चे तेल के दामों में कमी से हमें मंहगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी।
सभी बैंकों के सीआरआर में 100 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई।
आरबीआई के उपायों से मार्केट में 3.7 लाख करोड़ की लिक्विडिटी आएगी।
देश का बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित है, लोग घबराएं नहीं। सबका फंड सुरक्षित है।
आरबीआई आने वाले वक्त में कुछ और फैसले ले सकता है।
सभी कमर्शल बैंकों को ब्याज और कर्ज अदा करने में 3 महीने की छूट दी जा रही है।
कोरोना संकट की वजह से देश के कई क्षेत्रों में असर पड़ा है। हम ऐसे फैसले कर रहे हैं जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखा जा सके। अर्थव्यवस्था में इस समय अनिश्चितता का माहौल। दुनियाभर की अर्थव्यवस्था के लिए मंदी के हालात। अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल वक्त हमेशा नहीं रहता। दुनियाभर की अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल वक्त, भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर पर सकता है। आप लोग धैर्य बनाए रखें, महंगाई को काबू में करने की कोशिश है।

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