भोपाल. भोपाल के आसपास पहले से ही 18 स्थानीय बाघों का मूवमेंट है, लेकिन इस समय शहर के 30 किमी के दायरे में पांच नए बाघ का भी मूवमेंट है। ये नई टेरेटरी की तलाश में ग्रीन एरिया तक पहुंच रहे हैं। भोपाल के नजदीक इतने बाघ वन विभाग के लिए ही नहीं बल्कि प्रशासन व शासन के लिए एक चुनौती बनकर उभरेंगे। इसके लिए अभी से ही मास्टर प्लान तैयार होना चाहिए। यह खुलासा सोमवार को केरवा में वन विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट़्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के एक्सपर्ट व रिसर्च स्कॉलर डीपी श्रीवास्तव ने किया।
समरधा रेंज के रेंजर एके झंवर ने बताया कि डब्ल्यूआईआई के स्कॉलर की टीम भोपाल के बाघों पर रिसर्च कर रही है। वे यह जानने के लिए आए हैं कि शहर के नजदीक रह रहे बाघ इंसानों की बस्ती के नजदीक बिना संघर्ष के कैसे जीवित रह रहे हैं। टीम में आईआईएफएम के रिसर्च एसोसिएट डॉ. अमित कुमार, बीयू और मुंबई भरत कॉलेज के स्टूडेंट वॉलेंटियर के रूप में सहयोग कर रहे हैं।
सुझाव…मास्टर प्लान में बाघों व जंगल को दें प्राथमिकता
श्रीवास्तव का कहना है कि भोज विवि तक पहुंचने वाला बाघ स्थानीय नहीं बल्कि नया बाघ था। यह अकेला मामला नहीं है इस क्षेत्र में नए बाघों का मूवमेंट बढ़ रहा है। आने वाले सालों में इस तरह का दबाव और बढ़ेगा इसके लिए वन विभाग को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही शासन को शहर का मास्टर प्लान तैयार करते समय बाघों और जंगल को पहली प्राथमिकता देना होगी, नहीं तो स्थिति भयावह हो जाएगी।
हकीकत यह भी… केरवा, समरधा, कठोतिया में बढ़ा दबाव
रिसर्च स्कॉलर डीपी श्रीवास्तव ने बताया कि 2016 में बाघ ज्यूडिशियली अकादमी तक पहुंचा था। तब बार लगा कि शहर के अंदर बाघ रहवासियों के साथ कैसे सरवाइव कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने इसी विषय पर रिसर्च करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि अभी तक एकत्रित किए गए डाटा में एक बात निकलकर आई है कि केरवा, समरधा,कठोतिया और सीहोर में यहां पर स्थानीय बाघ का तो मूवमेंट है, लेकिन नए बाघ भी इलाके में अपना दावा ठोकने आ रहे हैं जिससे क्षेत्र में दबाव बढ़ रहा है।
वन विहार : मुन्ना की तबीयत खराब
वन विहार में रह रहे विश्व प्रसिद्ध बाघ मुन्ना की तबीयत खराब हो गई। इसकी उम्र 16 वर्ष के आसपास है। वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि वे जब रविवार को उसका रुटीन चेकअप कर रहे थे तब उन्होंने पाया कि वह पिछले पैरों पर वजन नहीं ले पा रहा है।

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