• भाजपा बोली- किसानों को राहत देने की सरकार की पोल खुली

भोपाल। ‘महेश कुमार धाकड़ जी, जय किसान फसल ऋण माफी योजना में आपका आवेदन मिला है। लोकसभा चुनाव आचार संहिता के कारण आपकी ऋण माफी अभी स्वीकृत नहीं हो पाई है। चुनाव के बाद शीघ्र स्वीकृत की जाएगी।’ दस मार्च दोपहर 2 बजकर 24 मिनट पर मुख्यमंत्री कमलनाथ का यह मैसेज रवाना हुआ।

इसी तरह का मैसेज दोपहर दो बजे के करीब मालती बाई को भी भेजा गया, जबकि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के लिए चुनाव आयोग ने शाम को पांच बजे प्रेस कांफ्रेंस की। भाजपा ने इस मुद्दे को लपकते हुए कहा कि किसानों की कर्जमाफी की पोल खुल गई। वह इंतजार कर रही थी कि जल्द से जल्द आचार संहिता लगे, ताकि किसानों का कर्ज माफ न हो। यह गंभीर मसला है, जांच होनी चाहिए। इधर, मैसेज जल्दी भेजने को लेकर कर्जमाफी से जुड़े सरकारी महकमे ने चुप्पी साध ली है।

अगले दो-तीन महीने में किसानों का पूरा कर्जा माफ होगा : कमलनाथ
मुख्यमंत्री ने कहा है कि अगले दो-तीन महीनों में किसानों का पूरा कर्जा माफ हो जाएगा। कुल 24 लाख 84 हजार किसानों के खातों में कर्ज माफी की कार्यवाही की गई। बीस लाख किसानों का कर्ज माफ हो चुका है। यह प्रक्रिया चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि किसान का जन्म कर्जे में होता है। उसकी मृत्यु भी कर्जे में होती है। कर्जमाफी की कार्यवाही अभी रुकी नहीं है। बचे हुए सभी पात्र किसानों का भी पूरा कर्जा माफ होगा।

अंतर्यामी हैं मुख्यमंत्री कमलनाथ : भार्गव 
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इस मैसेज को लेकर तंज कसा है कि सीएम कमलनाथ अंतर्यामी हो गए हैं। उनकी आत्मा ने पहले ही सुन लिया था कि तीन घंटे बाद आचार संहिता लगने वाली है। दरअसल, कांग्रेस तो बहाना तलाश रही थी कि कब आचार संहिता लगे और पैसा न देना पड़े। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार ने झुनझुना थमाया था। पैसा है नहीं, कहां से देते। किसान अब समझ चुके हैं कि उनके साथ मजाक हुआ।

सूची सौंप रहे हैं, अब नेता प्रतिपक्ष लें संन्यास :सलूजा 
इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि भाजपा नेताओं की कर्जमाफी को लेकर की जा रही बयानबाजी किसानों के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि जबलपुर में तो नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव यहां तक बोल गए हैं कि प्रदेश सरकार ने एक भी किसान का कर्जमाफ किया हो तो उसका नाम बताए, मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा। सलूजा ने कहा कि मैं इस पत्र में उन किसानों की कर्जमाफी के प्रमाण पत्र सौंप रहा हूं, यह संख्या हजारों में है, जिनके 1 लाख 90 हजार से 2 लाख तक के कर्जे माफ हुए। इसमें किसानों के नाम, मोबाइल नंबर, प्रमाण पत्र और सरकार द्वारा बैंक को अदा की गई राशि की जानकारी है। इस स्थिति में नैतिकता के आधार पर नेता प्रतिपक्ष को संन्यास ले लेना चाहिए।

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