किसी भी व्यक्ति का वृद्धावस्था में अपने जीवन यापन को लेकर चिंतित होना स्वभाविक है. यही वजह है कि बुढ़ापे की चिंता करने वाले लोग अपनी कमाई के दौरान ही निवेश शुरू कर देते हैं. मोदी सरकार की अटल पेंशन योजना (APY) भी इसी निवेश का हिस्‍सा है.  इस योजना में निवेश कर एक फंड तैयार किया जा सकता है. यह फंड आपके या आपके परिवार के लिए बुढ़ापे का सहारा बन जाएगा. लेकिन अब इस स्‍कीम में मोदी सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. बदलाव की जानकारी लेने से पहले जानिए कि आखिर क्‍या है यह अटल पेंशन योजना.

क्‍या है अटल पेंशन योजना 
मई 2015 में शुरू हुई अटल पेंशन योजना के तहत रिटायरमेंट के बाद के खर्च के लिए आपको नियमित आय मिलती है. यह योजना असगंठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए काफी अहम है.  इस योजना में निवेश करने वाले शख्‍स की अगर असामयिक मृत्यु हो जाती है तो परिवार को फायदा जारी रखने का प्रावधान है. इस योजना में कोई भी भारतीय निवेश शुरू कर सकता है.

बैंक खाता होना जरूरी  

मोदी सरकार की इस स्‍कीम का फायदा उठाने के लिए आपका आधार से लिंक बैंक अकाउंट होना जरूरी है. हालांकि इस स्‍कीम का फायदा वो लोग नहीं उठा सकते हैं जो सरकारी कर्मचारी हैं या फिर पहले से ही EPF, EPS जैसी योजना का लाभ ले रहे हैं.

क्‍या है बदलाव का प्रस्‍ताव 

दरअसल, फाइनेंस मिनिस्‍ट्री की ओर से अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में प्रवेश की ऊपरी आयु सीमा को बढ़ाकर 50 वर्ष करने का प्रस्‍ताव है. अभी योजना लेने की ऊपरी सीमा 40 साल है. आसान भाषा में समझें तो नए नियम के बाद 50 साल की उम्र तक के लोग इस स्‍कीम के तहत निवेश शुरू कर सकेंगे. इसके अलावा गारंटीशुदा न्यूनतम पेंशन राशि को दोगुना कर 10 हजार रुपये मासिक करने की भी योजना है. बता दें कि अभी तक अटल पेंशन योजना के तहत कम से कम 1,000 रुपये और अधिकतम 5,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है.

वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार के मुताबिक इस स्‍कीम को आकर्षक बनाने के लिये पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने वित्त मंत्रालय को कुछ सुझाव भेजे हैं. इनमें उपरोक्‍त दोनों प्रस्‍ताव रखे गए हैं.  इसके अलावा बैंकों से भी कहा गया है कि वह एपीवाई योजना को आगे बढ़ाने के लिये नए उपायों की खोज करें.

इस योजना के तहत निवेश करने वाले के पैसे डूबने का कोई संकट नहीं रहता है. निवेशक की मौत होने की स्थिति में परिवार के सदस्‍य अकाउंट में योगदान जारी रखकर योजना का लाभ पा सकते हैं. इसके अलावा मौत होने पर पति या पत्नी एकसाथ पेंशन अकाउंट में जमा की गई राशि एक साथ ले सकते हैं.

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