एजेंसी, नई दिल्ली। केंद्र सरकार विदेश में फंसे भारतीयों को लाने के लिए एक बड़े अभियान की तैयारी कर रही है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को कहा कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद जहाजों और विमानों के जरिये खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रों में फंसे हजारों भारतीयों को लाया जाएगा।सरकार ने इसके लिए कई राज्यों से पहले ही संपर्क साधा है, ताकि भारतीयों की वापसी के बाद उनके स्वास्थ्य की निगरानी के साथ अन्य इंतजाम किए जा सकें। सूत्रों के मुताबिक, नागरिक विमानन मंत्रालय ने अभियान से जुड़े कोर ग्रुप को अवगत करा दिया है कि उसके 650 व्यावसायिक विमानों में ज्यादातर इस मिशन के लिए तैयार हैं। नौसेना और वायुसेना को भी उनके कुछ प्लेटफॉर्म तैयार रखने के लिए कहा गया है। नौसेना ने एक हजार लोगों की क्षमता वाले आईएनएस जलस्व और दो अन्य पोत अभियान के लिए तैयार किए हैं। वायुसेना के कई मालवाहक विमान भी अभियान के लिए मुस्तैद हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के प्रमुखों से की है बात
यह ऑपरेशन राहत से बड़ा वापसी का अभियान होगा। यमन में गृह युद्ध तेज होने के बाद 2015 में ऑपरेशन राहत के तहत भारत सरकार 41 देशों के नागरिकों समेत 6700 लोगों को वापस लेकर आई थी। पिछले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान समेत कई खाड़ी देशों के नेताओं से बात की है। प्रधानमंत्री ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान, कतर के अमीर शेख तमीन बिन हमाद अल थानी, कुवैत के पीएम शेख सबाह अल खालेद और बहरीन के शासक हमाद बिन इसा अल खलाफी से भी चर्चा की है। इसमें उन देशों में रह रहे भारतीयों की देखभाल के बारे में भी बात हुई थी।
खाड़ी देशों को दी जाएगी प्राथमिकता
सूत्रों का कहना है कि खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की वापसी को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद यूरोप और अन्य हिस्सों में अभियान चलेगा। खाड़ी देशों में करीब 80 लाख भारतीय रहते हैं। महामारी को देखते हुए उनमें से हजारों रोजी-रोटी का संकट झेल रहे हैं। माना जा रहा है कि इन देशों के भारतीय दूतावासों को ऐसे संकटग्रस्त लोगों की पहचान करने को कहा गया है। अभियान लॉकडाउन खत्म होने के बाद शुरू होना है, हालांकि यह तय नहीं है कि तीन मई के बाद लॉकडाउन की अवधि बढ़ेगी या नहीं। ऐसे में अभियान कब शुरू होगा।

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