भोपाल। अक्सर ऐसा होता है जो भी भोपाल आता है वह कहता है बहुत खूबसूरत शहर है ,लेकिन मेरा इस शहर से अलग लगाव है। मेरी पत्नी सोनाली ने यहां से पढ़ाई की है। उन्होंने 10 साल भोपाल में बिताए हैं। उनका फैमिली बैकग्राउंड भी भोपाल से ही ताल्लुक रखता है। दूसरी बात मेरी एक फिल्म ‘एक विवाह ऐसा भी” की भी शूटिंग यहां हुई थी। उस समय मैंने यहां के गली मोहल्ले बहुत घूमे हैं। मैंने अपने मैनेजर से कहा है कि भोपाल इतना खूबसूरत शहर है क्यों न एक और फिल्म की और शूटिंग की जाए। यह कहना था फिल्म अभिनेता सोनू सूद का जो रविवार को एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने भोपाल पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की मदद के दौरान मिले अनुभव साझा किए और लोगों से टै्रफिक नियमों का पालन करने की अपील की। सुबह करीब 11 बजे भोपाल पहुंचे सोनू सूद पूरे समय प्रशंसकों से घिरे रहे। एमपीनगर स्थित एक होटल में दोपहर विश्राम करने के बाद शाम को वे बिट्टन मार्केट स्थित एक मोबाइल शोरूम का उद्घाटन करने पहुंचे। इस दौरान वहां भारी भीड़ इकट्ठा थी। अरेरा पेट्रोल पंप के सामने स्थित चौराहे पर जाम की स्थिति रही। हालांकि पुलिस ने व्यवस्था संभाल रखी थी। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भी मौजूद थे। एक सोच के सहारे आगे बढ़ता गया : मंच से फैंस को संबोधित करते हुए सोनू ने बताया कि जब कोरोना का दौर शुरू हुआ था और सब लोग सोच रहे थे कि सब खत्म हो जाएगा। कुछ दिन तो मैंने राशन बांटा और इंतजार करता रहा कि कोरोना कब खत्म होगा। एक दिन जब मैं खाना बांट रहा था, मुझे बहुत सारे प्रवासी भाई -बहन जाते हुए दिखे और उन्होंने मुझसे कहा कि दस दिन का खाना पैक करा दीजिए। हम मुंबई से बेंगलुरु जा रहे हैं और हमारे साथ छोटे-छोटे बच्चे भी हैं। मेरे लिए वो दिन लाइफ का टर्निंग पॉइंट रहा जब मैंने उन बच्चों को देखा। मां-बाप उनसे झूठ बोल रहे थे की एक घंटे में घर पहुंच जाएंगे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वे 10 दिन तक पैदल चलने वाले हैं। उस दिन से मैंने उन सभी प्रवासी भाई – बहनों की मदद करनी शुरू कर दी। लॉकडाउन के दौरान 7.5 लाख लोगों की मदद कर पाया। सोनू ने कहा कि जब मैं 18 साल का था तब मुंबई एक्टर बनने आया था। फिल्में करने के बाद मुझे लगा कि मैंने जिंदगी में बहुत कुछ पा लिया है। लोग मुझे जानने लगे हैं, लेकिन मैं गलत था असल किरदार मैंने कोरोनाकाल में निभाया है। जिसमें ऊपर वाला डायरेक्टर था। मुझे नहीं मालूम मैं कैसे यह कर रहा था ,लेकिन काम होता गया और लोगों तक पहुंचता गया। इस काम से मुझे एक सीख मिली जो शेयर करना चाहता हूं। उस समय मैं किसी भी डॉक्टर या एनजीओ को नहीं जानता था। मेरे साथ एक सोच थी जिसके दम पर आगे बढ़ता गया। आप लोगों से भी यही कहूंगा कि एक जिंदगी बदलने की कोशिश कीजिए, हजार कब हो जाएंगी पता नहीं चलेगा।

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