जम्मू। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सख्ती के बाद अब आतंकी हथियारों के लिए नए रास्तों का सहारा ले रहे हैं। आतंकी सरगना अब जम्मू कश्मीर में अपने कैडर तक हथियार और पैसा पहुंचाने के लिए देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय एजेंटों की मदद ले रहे हैं। हथियार सीमा पार पहुंचाने में उनको पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है।

यह खुलासा गुरुवार को लखनपुर में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों के पकड़े जाने से हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई और गुलाम कश्मीर में बैठे आतंकी सरगना वादी में सक्रिय अपने कैडर को रोजाना किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के निर्देश दे रहे हैं, लेकिन स्थानीय आतंकी सुरक्षाबलों के दबाव और पैसे व हथियारों की कमी का हवाला देते हुए विवशता जता रहे हैं। ऐसे में आईएसआई ने सीमा के रास्ते पैसे और हथियारों की सप्लाई करने के बजाए अन्य विकल्प तलाश किए हैं।

लखनपुर में पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ कर रहे एक अधिकारी ने बताया एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कड़ी चौकसी को देखते हुए आतंकी संगठन अब पंजाब, राजस्थान, गुजरात में सक्रिय अपने एजेंटों और तस्करों के जरिए हथियार सीमा पार से मंगवाकर कश्मीर पहुंचा रहे हैं। नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते भी हथियारों की तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है। इन्हें कश्मीर में पहुंचाने के लिए ट्रकों के अलावा यात्री वाहनों का भी प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हथियारों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में और कई बार में कश्मीर तक पहुंचाया जा रहा है।

आतंकियों की मानें तो जिस भी आतंकी कमांडर को हथियार की जरूरत होती है, वह अपने स्थानीय हैंडलर या फिर ओवरग्राउंड वर्कर से संपर्क करते हुए उसे हथियार प्राप्त करने और हथियार पहुंचाने की जगह के बारे में बता देता है। हथियारों को उनकी संख्या के आधार पर उनकी मंजिल तक पहुंचाने का किराया कुरियर को मिलता है। यह राशि पांच हजार से लेकर दो से ढाई लाख रुपये तक होती है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर हथियार प्राप्त करना और उन्हें वादी समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाना अब जोखिम भरा है। इसके अलावा जो पकड़ा जाता है, वही फंसता भी है। ऐसे में बहुत ही कम अवसरों पर आतंकी या ओवरग्राउंड वर्कर हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते हैं।

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